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हज़रत सय्यदना दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी (Part-1)
हज़रत सय्यदना दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह की आज़माइश पर सबरो शुक्र का इनआम :- एक मशहूर इल्मी घराने के चश्मों चिराग, ज़ुहदो तक़वा के पैकर, सलाहीयत व काबिलीयत के एतिबार से मुमताज़ और कई उलूम पर दस्तरस रखने वाले नौजवान आलिमे दीन का मामूल था के जब भी कोई मुश्किल...
इमामे रब्बानी मुजद्दिदे अल्फिसानी शैख़ अहमद सर हिंदी फ़ारूक़ी नक्शबंदी की हालाते ज़िन्दगी
आप की विलादत बा सआदत :- इमामुल वासिलीन हुज्जातुल आरफीन मुजद्दिदीन शैखुल इस्लाम यानि सिलसिलए नक्शबंदिया के अज़ीम पेशवा हज़रत सय्यदना मुजद्दिदे अल्फिसाने शैख़ अहमद सरहिंदी फ़ारूक़ी नक्शबंदी रहमतुल्लाह अलैह की पैदाइश मुल्के हिन्दुस्तान के मक़ाम "सरहिंद" में 971, हिजरी मुताबिक़...
मुजद्दिदे आज़म इमाम अहमद रज़ा खान सरकार आला हज़रत फाज़ले बरेलवी रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िन्दगी (Part-1)
कर अता अहमद रज़ाए अहमदे मुरसल मुझे मेरे मौला हज़रते अहमद रज़ा के वास्ते आप की विलादत शरीफ :- 10 शव्वाल 1272 हिजरी मुताबिक़ 14 जून 1856 ईस्वी बरोज़ हफ्ता ज़ुहर के वक़्त बरेली शरीफ उत्तर प्रदेश हिंदुस्तान में हुई | आप का नामे नामी इस्मे गिरामि :- मेरे आक़ा आला हज़रत, इमामे अहले...
माहे सफारुल मुज़फ्फर के महीने में किस बुज़रुग का उर्स किस तारीख को होता है
सफर का माना है "खाली होना" इस महीने में अहले अरब खाने पीने की चीज़ों की लिए बाहर निकल जाते थे और उन के मकान खाली होते थे | माहे सफर का चाँद देख कर सूरह अल नस्र पढ़ें | ﺑِﺴْﻢِ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﺍﻟﺮَّﺣْﻤَٰﻦِ ﺍﻟﺮَّﺣِﻴﻢِ ﺇِﺫَﺍ ﺟَﺎﺀَ ﻧَﺼْﺮُ ﺍﻟﻠَّﻪِ ﻭَﺍﻟْﻔَﺘْﺢُ ﻭَﺭَﺃَﻳْﺖَ ﺍﻟﻨَّﺎﺱَ...
मुजद्दिदे बरकातियत सय्यद शाह अबुल क़ासिम इस्माईल हसन बरकाती अल मारूफ “शाह जी मियाँ” रहमतुल्लाह अलैह की हालाते ज़िंदगी
आप तआरुफ़ :- बक़ीयतुस सलफ़ हुज्जतुल खलफ हज़रत सय्यद शाह अबुल क़ासिम इस्माईल हसन अल मारूफ "शाह जी मियाँ" की विलादत 3 मुहर्रमुल हराम 1272 हिजरी को मारहरा मुक़द्दसा में हुई | बैअत व खिलाफत अपने नाना सय्यद शाह गुलाम मुहीयुद्दीन अमीर रहमतुल्लाह अलैह से हासिल थी | वालिद माजिद...
सहाबिए रसूल हज़रत सय्यदना उमर फ़ारूक़े आज़म रदियल्लाहु अन्हु की हालाते ज़िन्दगी (Part- 4)
गवर्नरों से शर्तें हज़रत खुजैमा बिन साबित रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है :- के हज़रत उमर फ़ारूक़े आज़म रदियल्लाहु अन्हु जब किसी शख्स को कहीं का वाली (हाकिम,सरपरस्त) मुक़र्रर फरमाते तो उससे चंद शर्तें लिखवा लेते थे पहली शर्त ये के वो तुर्की घोड़े पर सवार नहीं होगा दूसरी शर्त...
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